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मोनिका :- "मैं कह रही हूँ—तुम जानवी से शादी कर लो।"कमरे में जैसे हवा जम गई।विकास...
---## **शीर्षक: "शून्य का सन्नाटा 6: विश्वास का अंत" (The End of Faith)**### **ए...
पार्थ और श्रुति: एक अधूरी प्रेम कहानीअध्याय 1: 12वीं का वह सुनहरा और अनकहा साल प...
- टैगलाइन: "जब तुम्हारी सबसे बड़ी कमजोरी तुम्हारी सबसे बड़ी ताकत बन जाए... तो दु...
एपिसोड 11: ज़ारा का हुक्म और अज़ीम की तलाशज़ोया की हालत और उसकी आखिरी वसीयत न...
किराये का सुकून शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी में समीर एक बड़े कॉर्पोरेट ऑफिस में का...
मिट्टी जैसा ताजलेखक: विजय शर्मा एरी ---प्रस्तावनाइतिहास की धूल में दबे साम्...
कमरा अँधेरा था। नील की पीठ नरम सतह से लगी हुई थी। बिस्तर। या शायद कुछ और—उसे फ़र...
हिरण्याक्ष-वध की कथाहिरण्यकश्यपु ने बड़े अच्छे ढंग से समझा-बुझाकर प्रह्लाद को पु...
ॐ समुद्र मंथन का आंतरिक दर्शन Vedanta 2.0 अज्ञात अज्ञानी द्वारा "यह कथा सुख-...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
नरक का निमंत्रण (The Hell’s Invite)** **दृश्य:** साल 2026। दुनिया कोरोना के दसवें वैरिएंट से जूझ रही है। कमांडर विक्रम एक अंधेरे कमरे में बैठा है, तभी एक होलोग्राम जलता है। *...
दरिया, परिंदे और वो अजनबी अज़ीम …. वह ज़ोया को जाते हुए देखता है और सोचता है— "यह कैसी अजनबी थी जो आई तो एक शोर की तरह थी (महंगी गाड़ी, रुतबा), पर छोड़ एक खामोशी गई। क्या यह...
पौराणिक कथाओं में विष्णुभक्त प्रह्लाद की कथा का अत्यंत महत्त्व है। यह कथा अन्याय, अत्याचार एवं अभिमान पर न्याय, सदाचार और स्वाभिमान की जीत की शिक्षा देती है। यह कथा उस समय की है, ज...
ट्रैक साँस रोके हुए था। सुपरकार वर्ल्ड चैंपियनशिप की आख़िरी रेस—जिस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी थीं। एरीना में मौजूद हज़ारों लोग और अपनी टीवी स्क्रीनों से चिपके करोड़ों दर्शक...
Heroine: शानवी सिंह Hero: कार्तिकेय (दिन में बिल्ली, रात में इंसान) शानवी सिंह को अकेलापन काटने दौड़ता था। बड़े शहर में छोटी सी नौकरी, छोटा सा कमरा और दिन भर का शोर… लेकिन रात...
"रात 3:12 बजे की दस्तक" — इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक बिल्कुल नई और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तक रात का सन्नाटा इतना गह...
शहर की शोर-शराबे वाली गलियों के बीच एक छोटा सा कोना ऐसा था, जहाँ वक्त जैसे ठहर सा जाता था। 'रिदम कैफे'—पुरानी ईंटों की दीवारें, पीली मद्धम रोशनी और हवा में तैरती ताज़ा पिसी...
रात का दूसरा पहर था। जैसलमेर का सोनार किला चाँदनी में नहाया हुआ था, और रेगिस्तान की ठंडी हवा रेत के कणों को हल्के-हल्के उड़ा रही थी। दूर से लोक-संगीत की धुनें आ रही थीं—रावणहत्था क...
बारिश की पहली बूँद और एक अधूरा नाम रचयिता: बाबुल हक़ अंसारी उस रोज़ बारिश कुछ अलग थी… ना ज़ोर से बरसी, ना आहिस्ता गिरी — बस जैसे किसी की यादों को छूने आई हो।...
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