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एपिसोड 2: कॉफी का पहला स्वादरिया की उंगलियां फोन पर रुकीं। आरव का मैसेज स्क्रीन...
भाग 11 The Catcher in the Rye – युवाओं की उलझनों और समाज की सच्चाईलेखक: J. D. Sa...
पटना के बाहरी इलाके में, जहाँ गंगा की लहरें खामोशी से बहती हैं, वहाँ एक विशालकाय...
उस रात आसमान से गिरती बारिश की फुहारें महज़ पानी की बूंदें नहीं थीं, बल्कि ऐसा जा...
: 'चेतना का महासागर' और विस्मृति का जाल1. शून्य का नया आयाम: 'द वॉइड...
मन की चमक “अपमान की शुरुआत” सुबह की हल्की धूप खिड़की से अंदर आ रही थी।छोटे से घ...
Chapter 2 — अतीत का बुलावाआर्यन की धड़कनें उसके कान के पर्दे फाड़ने को बेताब थीं...
चेतन कहता है।> गुरुदेव जब मैं हॉस्पिटल से भागकर दक्षराज के घर गया था । तब वहां प...
 : : प्रकरण - 64 : : जिस तरह मैं सुशील भाई के एडजस्ट नही...
लेकिन ज़िंदगी उतनी आसान नहीं होती जितनी इंसान सोच लेता है।कभी-कभी तो वो हमारे ख्...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
"दुनिया में कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं जिन्हें हमारा दिमाग तो नहीं मानता, लेकिन हमारी रूह महसूस कर सकती है। हम अक्सर अंधेरे रास्तों पर चलते हुए पीछे मुड़कर देखते हैं, यह सोचकर कि...
अमावस्या की रात थी और रात के 11 बज रहे थे । भानपुर गांव का एक तांत्रिक अपनी तात्रिकं साधना करने के लिए सुंदरवन की तरफ जा रहा था । गांव मे ये मान्यता थी के जो कोई भी तात्रिकं अमावस्...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
शालिनी, तुमने अपने घर पर हमारे अफेयर के बारे में बात की?" विकास ने धीमी लेकिन बेचैन आवाज़ में पूछा। शालिनी ने गहरी सांस ली और सिर झुका कर बोली— "नहीं..." विकास...
कभी-कभी जिंदगी हमें ऐसे मोड़ पर ले आती है, जहाँ प्यार और दोस्ती की परिभाषा बदल जाती है। बचपन की मासूम दोस्ती धीरे-धीरे दिल की गहराई में उतर जाती है, लेकिन समय, दूरी और परिस्थितियाँ...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
मजबूरी की शादीबारिश की वो रात भूला न जाने वाली थी। पटना की तंग गलियों में पानी की धाराएँ तेज़ी से बह रही थीं, सड़कें नदियों में बदल चुकी थीं। मानो आसमान भी अनन्या मिश्रा के आँसुओं...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जम्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी.मुझे देखकर मेरे माता पीता खुश हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी. नर्स ने मुझे प...
दस वर्षीया पारुल दौड़ती जा रही है। नदी के किनारे-किनारे। रेत पैरों में चुभ रही है, मगर वह हँस रही है। बालों में दो चोटियाँ हैं, हरी फ्रॉक हवा में लहरा रही है। पैरों में...
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